
अजीब कारनामा: दुबौलिया पुलिस ने 35 साल पहले मरे व्यक्ति को बनाया आरोपी
बस्ती पुलिस की बड़ी लापरवाही: मृत व्यक्ति पर दर्ज कर दिया मुकदमा; खाकी की कार्यप्रणाली पर सवाल: दुनिया छोड़ चुके शख्स के खिलाफ दर्ज हुआ केस
अजीत मिश्रा (खोजी)
दुबौलिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: मृत व्यक्ति के खिलाफ दर्ज कर दिया मुकदमा
- पिठिया लश्करी गांव का मामला: क्या बिना जांच के ही पुलिस ने दर्ज कर दिया मुकदमा?
- पुलिस की लापरवाही या कागजी खानापूर्ति? मृत व्यक्ति का नाम मुकदमे में देख लोग हैरान
बस्ती: जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र से पुलिस की घोर लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने जमीन विवाद के एक मामले में कार्रवाई करते हुए ऐसे व्यक्ति को आरोपी बना दिया, जिसकी मृत्यु 35 साल पहले ही हो चुकी है। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला दुबौलिया थाना क्षेत्र के पिठिया लश्करी गांव का है। बताया जा रहा है कि गांव के ही राकेश प्रताप सिंह और रामहियारे के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। राकेश प्रताप सिंह की शिकायत पर पुलिस ने रामहियारे और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
35 साल पहले हो चुका है निधन
जब पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे की कॉपी सामने आई, तो उसमें नाम देखकर ग्रामीण दंग रह गए। आरोपियों की सूची में ‘रामदुलारे’ का भी नाम शामिल था। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि रामदुलारे का निधन हुए करीब 35 वर्ष बीत चुके हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो व्यक्ति दशकों पहले दुनिया छोड़ चुका है, पुलिस ने उसके खिलाफ बिना किसी भौतिक सत्यापन के मुकदमा कैसे दर्ज कर दिया।
पुलिस की सफाई और लोगों में आक्रोश
मृत व्यक्ति के नामजद होने की खबर फैलते ही गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने बिना जमीन पर उतरे या सही जानकारी जुटाए केवल शिकायत के आधार पर खानापूर्ति कर दी, जिससे पुलिस की निष्पक्ष जांच पर अविश्वास पैदा हो गया है।
इस पूरे मामले पर जब दुबौलिया थाना प्रभारी जीवन त्रिपाठी से बात की गई, तो उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा, “मुकदमा शिकायतकर्ता द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर दर्ज किया गया है।”
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न
कानूनी जानकारों का मानना है कि पुलिस को कोई भी केस दर्ज करने से पहले आरोपों की प्राथमिक जांच करनी चाहिए। मृत व्यक्ति के खिलाफ नामजदगी यह दर्शाती है कि पुलिस ने इस मामले में संवेदनशीलता और सतर्कता नहीं बरती। फिलहाल, यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग वरिष्ठ अधिकारियों से इस लापरवाही की जांच की मांग कर रहे हैं।
















